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    जयशंकर–मैक्रों मुलाकात से भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई गति

    3 months ago

    पेरिस में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है। इस बैठक में वैश्विक हालात, बदलती अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा भारत के प्रति दिखाई गई सकारात्मक सोच और सहयोग की भावना की सराहना की।

    डॉ. जयशंकर इन दिनों फ्रांस और लक्ज़मबर्ग की छह दिवसीय यात्रा पर हैं। इसी दौरान उन्होंने फ्रांस के राजदूत सम्मेलन को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में आ रहे बदलावों पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में व्यापार, वित्त, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, संसाधन और संपर्क जैसे क्षेत्रों में तेज़ बदलाव देखने को मिल रहे हैं और इन्हीं बदलावों ने देशों की सोच और प्राथमिकताओं को प्रभावित किया है।

    विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि यूरोप वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को और गहरा करे। उनके अनुसार, भारत और यूरोप मिलकर न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता ला सकते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संतुलन बनाए रखने में भी योगदान दे सकते हैं।

    फ्रांस के साथ भारत की साझेदारी को डॉ. जयशंकर ने बहुआयामी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देने में एक-दूसरे के सहयोगी हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत-फ्रांस सहयोग लगातार आगे बढ़ रहा है और इसका असर वैश्विक मंच पर भी दिखाई दे रहा है।

    फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ हुई अलग बैठक में भी इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आने वाले महीनों में सहयोग को नई दिशा देने और भविष्य की योजनाओं पर काम करने पर सहमति जताई। खास तौर पर राष्ट्रपति मैक्रों की प्रस्तावित भारत यात्रा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले तकनीकी सम्मेलनों को लेकर तैयारियों पर विचार किया गया।

    डॉ. जयशंकर ने अपनी यात्रा के दौरान ऊर्जा से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर भी संवाद किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के नेतृत्व के साथ बातचीत में तेल बाजार, ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर विचार साझा किए। इसके अलावा, उन्होंने युवा पेशेवरों और उद्यमियों से भी मुलाकात की, जिससे दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूती मिल सके।

    लक्ज़मबर्ग दौरे के दौरान भी विदेश मंत्री ने वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि लक्ज़मबर्ग भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार है, खासकर वित्त और निवेश के क्षेत्र में।

     

    कुल मिलाकर, यह यात्रा और उच्च-स्तरीय बैठकें इस बात का संकेत हैं कि भारत और फ्रांस अपने रिश्तों को केवल द्विपक्षीय स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उन्हें वैश्विक संदर्भ में और सशक्त बनाना चाहते हैं। बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत-फ्रांस साझेदारी को स्थिरता, सहयोग और संतुलन का एक अहम आधार माना जा रहा है।

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