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    हर चुनौती मेरे लिए मोटिवेशन होती हैः शुभम कुमार

    1 hour ago

    जेईई एडवांस्ड: आल इंडिया रैंक-1

    पिताः शिवकुमार (हार्डवेयर व्यवसायी)

    माताः कंचन देवी

    जन्मतिथि: 20 सितंबर 2008

    एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने जेईई-एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक प्राप्त कर आॅल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। शुभम ने जेईई मेन में 100 परसेंटाइल स्कोर किया था और आल इंडिया रैंक 6 हासिल की थी। मूलतः गया बिहार के साधारण परिवार से आने वाले शुभम की सफलता लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पिछले दो वर्षों से एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ने साबित किया है कि सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, रेगुलर प्रेक्टिस और काॅन्फिडेंस से बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। शुभम की इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिता शिवकुमार गया में हार्डवेयर की दुकान संचालित करते हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं। शुभम की बड़ी बहन वर्तमान में आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर रही हैं। एलन के साथ घर का शैक्षणिक माहौल और परिवार का निरंतर सहयोग शुभम की सफलता की मजबूत नींव बना।

    शुभम ने बताया कि मेरी सक्सेस का सबसे बड़ा कारण मेरे टीचर्स और परिवार का त्याग और विश्वास बहुत महत्वपूर्ण रहा। पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि मां ने हर भावनात्मक एवं मानसिक मजबूती दी। मैंने हमेशा फैकल्टीज की हर बात को गंभीरता से सुना और उन्हीं के बताए हुए तरीके को फॉलो किया। जब भी कोई टॉपिक कठिन लगता था, मैं बार-बार डाउट पूछता था। एलन की फैकल्टीज ने हर कॉन्सेप्ट को बेसिक्स से समझाया, जिससे मेरी नींव बहुत मजबूत हुई। मुझे लगता है कि अगर छात्र अपने टीचर्स पर भरोसा करके डिसिप्लिन के साथ पढ़ाई करें, तो बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मैं रोजाना 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते था। क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करना मेरे डेली रूटीन में शामिल था। डेली प्रश्नों की प्रैक्टिस करते थे और कमजोर टाॅपिक्स पर विशेष फोकस करता था। जेईई की तैयारी में कई बार प्रेशर आ जाता है, लेकिन मैंने उसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैंने हर चुनौती को मोटिवेशन में बदला। मेरा पूरा फोकस सिर्फ अपने लक्ष्य पर था। अब मैं देश के आईआईटी, मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करूंगा।

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    सेल्फ स्टडी में अटेंशन स्पान और क्वालिटी लर्निंग जरूरी: कबीर छिल्लर

    आॅल इंडिया रैंक-2

    पिता: मोहित छिल्लर (आईआईटीयन)

    माता: प्रियंका छिल्लर (प्राइवेट टीचर)

    जन्मतिथिः 30 जुलाई 2008

    एलन कोटा के क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने जेईई-एडवांस्ड में आॅल इंडिया रैंक-2 प्राप्त की है। परिवार मूलतः दिल्ली-एनसीआर गुरूग्राम से है। पिछले दो वर्षों से एलन कोटा के क्लासरुम स्टूडेंट कबीर की यह उपलब्धि लगातार मेहनत, सटीक रणनीति और सेल्फ एनालिसिस का परिणाम है। कबीर के पिता मोहित छिल्लर आईआईटीयन हैं और वर्तमान में दिल्ली एनसीआर में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, जबकि मां प्रियंका छिल्लर प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। कबीर ने जेईई-मेन में 300 मे ंसे 300 अंक प्राप्त कर आॅल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। इससे पहले 10वीं कक्षा 98 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण कर चुके हैं। कबीर आईआईटी मुम्बई से कम्प्यूटर साइंस ब्रांच में बीटेक करने के बाद वल्र्ड की नंबर-1 मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी (एमआईटी) से उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहता है।

    कबीर ने बताया कि मेरी सक्सेस का मुख्य कारण एलन कोटा में फैकल्टीज का गाइडेंस मानता हूं, साथ ही मंैंने अपने पढ़ाई करने के तरीके को भी अलग बनाया है। क्योंकि मैं सेल्फ स्टडीज में अटेंशन स्पान और क्वालिटी देखता हूं। हर टेस्ट के बाद खुद का एनालिसिस किया और जहां कमी थी, उसी पर सबसे ज्यादा फोकस किया। मैं एग्जाम से पहले स्टडी स्ट्रेटेजी को फाइन ट्यून करता हूं। नियमित मॉक टेस्ट देने के साथ-साथ हर पेपर का गहराई से एनालिसिस किया, जिससे मेरी एक्यूरेसी और टाइम मैनेजमेंट दोनों बेहतर होते चले गए। कॉन्सेप्ट क्लियर होना सबसे जरूरी है। रटने की बजाय हर टॉपिक को समझना और उसे एप्लाई करना ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रही। पढ़ाई को छोटे-छोटे टारगेट्स में विभाजित किया, शॉर्ट नोट्स बनाए और नियमित रिवीजन को अपनी आदत बनाया। गलतियों को दोहराने से बचने के लिए मैं हर टेस्ट के बाद कमजोरियों पर फोकस करता था। मैं दोस्तों के साथ समय बिताता हूं, जिससे मानसिक रूप से रिफ्रेश रहने में मदद मिलती है।

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    अनुशासित और नियमित प्रयासों से ही मिलते हैं बड़े परिणाम: जतिन

    जतिन कुमार चाहर, गांव गोठ, झुंझुनूं (राजस्थान)

    जेईई एडवांस्डः आॅल इंडिया रैंक-3

    पिताः दिनेश चाहर (बीएसएफ, ग्वालियर)

    मांः मोनिका कुमारी

    जन्मतिथिः 2 दिसंबर 2008

    एलन क्लासरूम स्टूडेंट जतिन कुमार चाहर ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की है। जतिन छह साल से एलन का रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट है। परिवार मूलतः राजस्थान के झुंझुनूं जिले के छोटे से गांव गोठ से है। जतिन साधारण ग्रामीण परिवेश से आता है। जतिन ने 10वीं कक्षा 97 प्रतिशत एवं 12वीं कक्षा 95.2 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की। जेईई मेनः आॅल इंडिया रैंक 133 प्राप्त की। इसके अलावा चारों ओलंपियाड्स आईजेएसओ, आईईएसओ, आईओएए एवं आईएनसीएचओ में ओसीएससी कैम्प तक पहुंच चुका है। जतिन ने बताया कि सफलता किसी एक दिन की मेहनत से नहीं मिलती, बल्कि रोजाना की छोटी-छोटी कोशिशें ही बड़ा परिणाम बनती हैं। मैंने शुरुआत से ही अपना पूरा फोकस कॉन्सेप्ट क्लियर करने पर रखा। विषय को गहराई से समझना जरूरी है। एलन फैकल्टीज ने हर टॉपिक को बहुत अच्छे तरीके से समझाया। मैं क्लास में पूरा ध्यान देता था और उसी दिन पढ़ाए गए टापिक को दोबारा रिवाइज करता था। मॉक टेस्ट देता था और हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का एनालिसिस करता था। मैंने कभी नंबरों पर फोकस नहीं किया। मेरा लक्ष्य कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सुधारना था। टेस्ट में जहां गलती होती थी, वहां ज्यादा मेहनत करता था। मैं रोजाना लगभग 7 से 8 घंटे सेल्फ-स्टडी करता था, क्योंकि मेरा मानना है कि जेईई की तैयारी में निरंतरता सबसे ज्यादा जरूरी होती है। मैं अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के सहयोग को दूंगा। परिवार के विश्वास और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने मेरा आत्मविश्वास मजबूत बनाए रखा। पेरेन्ट्स ने हमेशा मुझे मोटिवेट किया। उन्होंने कभी दबाव नहीं बनाया, बल्कि हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया। जब भी मैं थकता था, परिवार और टीचर्स मुझे फिर से प्रेरित करते थे। मैं आईआईटी मुम्बई से बीटेक करने के बाद सिविल सर्विस में जाना चाहता हूं।

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    गर्व है कि मैं कोटा से हूं: अर्णव

    जेईई-एडवांस्ड - एआईआर-07

    पिताः डॉ. बुद्धिप्रकाश (ज्योग्राफी शिक्षक)

    मांः निधि गौतम (गर्वनमेन्ट टीचर)

    एलन कोटा के क्लासरूम स्टूडेंट अर्णव गौतम ने जेईई एडवांस्ड में आॅल इंडिया रैंक 07 हासिल की है। कोटा निवासी अर्णव पिछले छह वर्षों से एलन कोटा में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट है। इससे पहले 10वीं कक्षा 95.8 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। 2023 में जूनियर साइंस ओलंपियाड के ओसीएससी, 2024 में एस्ट्रो ओलंपियाड के ओसीएससी और 2025 में फिजिक्स ओलंपियाड के ओसीएससी में भाग लिया। इसके अलावा एशियन फिजिक्स ओलंपियाड 2025 में ब्रॉन्ज मेडल मिला। जेईई-मेन में अर्णव ने एआईआर-5 हासिल की। मेरे दिमाग में हमेशा टारगेट रहता था कि मुझे यह हासिल करना है। अब मैं आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस ब्रांच में बीटेक करना चाहता हूं। अर्णव ने बताया कि जब-जब रिजल्ट आते हैं और कोटा की बात आती है तो गर्व महसूस होता है कि मैं कोटा से ही हूं। यहां एलन के साथ तैयारी से मेरी अकेडमिक्स मजबूत हुई। मेरा मानना है कि सेल्फ स्टडी बहुत जरूरी है, लेकिन सही गाइडेंस के लिए कोचिंग के सहयोग भी जरूरी है। यदि कोच अच्छे हैं और अच्छा मार्गदर्शन मिलता है तो प्रतिभा निखरती है और उससे रिजल्ट्स अच्छे आते हैं। मुझे अच्छा गाइडेंस मिला और इससे कमजोरियां दूर होती चली गई। जेईई जैसे एग्जाम की तैयारी में डाउट्स का तुरंत समाधान होना बेहद जरूरी है, जो फैकल्टीज के मार्गदर्शन से ही संभव हो पाता है।

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    फिक्स स्टडी आवर्स नहीं, बल्कि इफेक्टिव स्टडी पर रहा फोकसः कनिष्क जैन

    जेईई एडवांस्ड 2026: ऑल इंडिया रैंक 8

    पिताः रितुल जैन (आईटी प्रोफेशनल)

    मां: सरिता गुप्ता

    एलन कोटा क्लासरूम स्टूडेंट कनिष्क जैन ने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक-8 हासिल की है। पिछले दो वर्षों से एलन के क्लासरूम स्टूडेंट कनिष्क ने जेईई मेन्स में ऑल इंडिया रैंक 36 प्राप्त की थी। कनिष्क का चयन वल्र्ड रैंकिंग नंबर-1 मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी (एमआईटी) में हो चुका हैं। परिवार मूलतः कोटा से है पिता रितुल जैन पुणे में आईटी प्रोफेशनल हैं तथा मां सरिता गृहिणी हैं। 10वीं कक्षा 90.8 प्रतिशत और 12वीं बोर्ड में 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। 10वीं कक्षा में एशियन फिजिक्स ओलंपियाड (एपीएचओ) में ऑनरेबल मेंशन, 11वीं में इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड (आईपीएचओ) में गोल्ड मेडल तथा एपीएचओ में सिल्वर मेडल हासिल किया। वहीं, 12वीं में उसका चयन आईपीएचओ के लिए भारतीय टीम में हुआ है। आईजेएसओ में गोल्ड मेडल जीतने के साथ थ्योरी टॉपर रहा। कनिष्क ने बताया कि जेईई की तैयारी के लिए एलन एवं कोटा बेस्ट काॅम्बीनेशन है। ओलंपियाड्स में भाग लेने से सब्जेक्ट्स को गहराई से समझने का अवसर मिलता है। ओलंपियाड्स की तैयारी ने मुझे कठिन प्राॅब्लम्स को साॅल्व करने की क्षमता दी, जिसका लाभ मुझे जेईई की तैयारी में भी मिला। क्वालिटी स्टडी और सब्जेक्ट की समझ ज्यादा महत्वपूर्ण है। मेरा कोई फिक्स स्टडी शेड्यूल नहीं था। रात में जल्दी सोेता था और सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करता था। हर स्टूडेंट का सीखने का तरीका अलग होता है, इसलिए अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार पढ़ाई करनी चाहिए।

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    मैथ्स में इंट्रेस्ट, यही मेरी सक्सेस: दर्श सिक्का

    जेईई एडवांस्डः आॅल इंडिया रैंक-10

    पिताः डॉ. कबीर सिक्का (ईएनटी सर्जन)

    माताः डॉ. आशी बिंद्रा (न्यूरो एनेस्थेसिस्ट)

    एलन क्लासरूम स्टूडेंट दर्श सिक्का ने जेईई एडवांस्ड में आल इंडिया रैंक-10 हासिल की है। दिल्ली निवासी दर्श पिछले दो वर्षों से एलन में अध्ययरत है। जेईई मेन्स में 99.999 पर्सेन्टाइल स्कोर हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 53 प्राप्त की थी। दर्श ने 10वीं और 12वीं दोनों बोर्ड परीक्षाओं में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड के ओसीएससी कैंप में शामिल हो चुका है। फिलहाल आईआईटी मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करना है। पिता डाॅ.कबीर सिक्का ईएनटी सर्जन हैं और मां डाॅ.आशी बिन्द्रा न्यूरो एनेस्थेसिस्ट हैं। दर्श ने बताया कि मजबूत कंसेप्ट्स, निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी हैं। सभी को लगता था कि मैं भी मम्मी-पापा की तरह मेडिकल फील्ड में जाउंगा लेकिन मैथ्स मेरा फेवरेट सब्जेक्ट रहा है और इसी इंटरेस्ट की वजह से मैंने जेईई की तैयारी करने का डिसीजन लिया। जेईई की तैयारी केवल कठिन प्रश्न साॅल्व करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सब्जेक्ट्स और सभी टाॅपिक्स के कंसेप्ट्स की गहराई से समझ होना जरूरी है। मैंने हर टॉपिक को गहराई से समझने और रेगुलरली प्रश्नों की प्रेक्टिस करने पर जोर दिया। मेरा मानना है कि छोटी कक्षाओं से ही कंसेप्ट्स मजबूत किए जाएं तो आगे की तैयारी काफी आसान हो जाती है। एक तरह से एलन में जाकर मुझे घर जैसा महसूस होता था। फैकल्टीज हो या स्टाफ, हर कोई हमेशा स्टूडेंट के साथ खड़ा दिखाई देता है। जेइई की तैयारी का जो सफर रहा उसमें एलन की फैकल्टीज एवं इंस्टीट्यूट के एनवायरमेंट का काफी सपोर्ट रहा।

    दर्श कहते हैं, मैंने हमेशा विषय को समझने पर फोकस किया, रटने पर नहीं। नियमित टेस्ट, उनकी एनालिसिस और अपनी कमजोरियों पर काम करना मेरी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। ओलंपियाड्स में भाग लेने से कठिन समस्याओं को हल करने का आत्मविश्वास बढ़ता है, इसलिए विद्यार्थियों को उनमें भी भाग लेना चाहिए। इसके लिए मैं डेली वॉक करता था और बैडमिंटन खेलता हूं।

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