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    डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी, शुरुआती कारोबार में 89.90 के स्तर पर पहुंचा

    3 months ago

    विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार सुबह रुपये में हल्की कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे टूटकर 89.90 के स्तर पर आ गया। बाजार से जुड़े जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की ओर से पूंजी निकासी का असर रुपये पर पड़ा है।

    सुबह के सत्र में अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 89.96 के स्तर पर खुला और कुछ समय बाद 89.90 तक पहुंच गया। यह गिरावट भले ही सीमित रही, लेकिन इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक कारकों का असर फिलहाल भारतीय मुद्रा पर बना हुआ है। कारोबारी वर्ग का मानना है कि डॉलर की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार में नरमी ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इसके चलते सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में डॉलर की मांग बढ़ी है। जब डॉलर की मांग बढ़ती है, तो उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर इसका सीधा असर पड़ता है, और भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहा।

    पिछले कारोबारी सत्र की बात करें तो रुपये में अच्छी मजबूती दर्ज की गई थी। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 31 पैसे मजबूत होकर 89.87 पर बंद हुआ था। बाजार में यह धारणा बनी कि उस दौरान केंद्रीय बैंक की सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने रुपये को सहारा दिया। हालांकि, अगले ही दिन वैश्विक संकेत बदलने से रुपये की चाल फिर सीमित दायरे में कमजोर होती दिखी।

    विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े लोगों के अनुसार, आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बनी हुई है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की ओर से शेयर बाजार से धन निकालने का सिलसिला भी रुपये पर दबाव डाल रहा है। जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से बाहर जाते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी भी एक अहम कारण रही। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे तौर पर देश के विदेशी मुद्रा खर्च को बढ़ाती है। इससे रुपये पर दबाव बनता है और मुद्रा में कमजोरी देखने को मिलती है।

    इस बीच, घरेलू शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी के चलते निवेशकों का रुझान सतर्क बना रहा। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का असर अक्सर मुद्रा बाजार पर भी देखने को मिलता है, क्योंकि दोनों बाजार आपस में जुड़े हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख—ये सभी कारक रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों की स्थिति और नीतिगत कदम भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    फिलहाल बाजार सहभागियों की नजर इस बात पर है कि रुपये में गिरावट सीमित दायरे में रहे। यदि वैश्विक दबाव बढ़ता है तो रुपये में और हल्की कमजोरी देखने को मिल सकती है, वहीं सकारात्मक संकेत मिलने पर इसमें सुधार भी संभव है। निवेशकों और कारोबारियों के लिए यह समय सतर्कता बरतने का है, क्योंकि मुद्रा बाजार में छोटे बदलाव भी आयात-निर्यात लागत और कारोबारी फैसलों पर असर डाल सकते हैं।

    कुल मिलाकर, गुरुवार सुबह रुपये में दर्ज की गई यह मामूली गिरावट बाजार की मौजूदा स्थिति को दर्शाती है। वैश्विक और घरेलू कारकों के बीच संतुलन बनते ही रुपये की दिशा और स्पष्ट हो सकती है। Yugcharan News आगे भी मुद्रा बाजार से जुड़ी हर अहम हलचल पर नजर बनाए रखेगा।

     
     
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