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    बजट 2026: आयकर को लेकर करदाताओं की उम्मीदें, क्या इस बार भी मिलेगी राहत?

    1 day ago

    नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश करने जा रही हैं। बजट से पहले सबसे अधिक चर्चा आयकर को लेकर हो रही है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाता यह जानने को उत्सुक हैं कि क्या पिछले साल की तरह इस बार भी उन्हें आयकर में कोई बड़ी राहत मिलेगी।

    बजट 2025 में सरकार ने नए टैक्स रिजीम में बड़े बदलाव करते हुए आयकर ढांचे को सरल बनाया था, जिससे लाखों करदाताओं को सीधा लाभ मिला। अब बजट 2026 से भी करदाता इसी तरह की राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।


    बजट 2025 में क्या मिली थी राहत

    पिछले साल के बजट में सरकार ने आयकर प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव किए थे। नए टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की आय को कर-मुक्त किया गया था। वेतनभोगी करदाताओं के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ने के बाद प्रभावी टैक्स-फ्री सीमा 12.75 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। इस फैसले से मध्यम वर्ग की कर देनदारी में उल्लेखनीय कमी आई थी।

    इसके साथ ही सरकार ने नया आयकर अधिनियम 2025 भी पेश किया, जिसका उद्देश्य कर कानून को सरल बनाना, पुराने प्रावधानों को हटाना और कर अनुपालन को आसान बनाना है। यह अधिनियम 1 अप्रैल से लागू होने वाला है।


    बजट 2026 से वेतनभोगियों की उम्मीदें

    इस बार वेतनभोगी वर्ग की प्रमुख मांग स्टैंडर्ड डिडक्शन को और बढ़ाने की है। फिलहाल नए टैक्स रिजीम में यह सीमा 75,000 रुपये है, जिसे पहले 50,000 रुपये से बढ़ाया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई को देखते हुए इसमें और वृद्धि की जा सकती है।

    इसके अलावा टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) नियमों को सरल करने की भी मांग उठ रही है, ताकि अनावश्यक कटौती और रिफंड की प्रक्रिया को कम किया जा सके।


    वर्तमान आयकर स्लैब (वित्त वर्ष 2025-26)

    पुराना टैक्स रिजीम

    • 2.5 लाख रुपये तक – शून्य

    • 2.5 से 5 लाख रुपये – 5%

    • 5 से 10 लाख रुपये – 20%

    • 10 लाख रुपये से अधिक – 30%

    नया टैक्स रिजीम

    • 3 लाख रुपये तक – शून्य

    • 3 से 6 लाख रुपये – 5%

    • 6 से 9 लाख रुपये – 10%

    • 9 से 12 लाख रुपये – 15%

    • 12 से 15 लाख रुपये – 20%

    • 15 लाख रुपये से अधिक – 30%


    पुराना बनाम नया टैक्स रिजीम

    पुराने टैक्स रिजीम में निवेश आधारित कई छूट और कटौतियां उपलब्ध हैं, जबकि नए टैक्स रिजीम में स्लैब ज्यादा हैं लेकिन दरें अपेक्षाकृत कम रखी गई हैं। नए रिजीम का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना है, जबकि पुराना रिजीम अभी भी उन करदाताओं के लिए फायदेमंद है जो नियमित निवेश और बचत योजनाओं का लाभ उठाते हैं।


    बजट 2026 में क्या बदलाव संभव

    कर विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार इस साल टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव करने से बच सकती है, क्योंकि पिछले साल ही व्यापक संशोधन किए गए थे। हालांकि, स्टैंडर्ड डिडक्शन और टीडीएस सीमाओं में कुछ राहत की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

    इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों और फिक्स्ड डिपॉजिट निवेशकों के लिए ब्याज आय पर कर राहत और बीमा कवर बढ़ाने जैसे सुझावों पर भी चर्चा हो रही है।


    निष्कर्ष

    कुल मिलाकर, बजट 2026 से करदाताओं को बड़े कर कटौती की उम्मीद भले ही कम हो, लेकिन छोटे-मोटे सुधारों और प्रक्रियात्मक सरलता की संभावनाएं बनी हुई हैं। सरकार का फोकस कर प्रणाली को स्थिर, सरल और निवेश-अनुकूल बनाए रखने पर रहने की संभावना है।

     

    अब सभी की निगाहें 1 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि क्या बजट 2026 मध्यम वर्ग के लिए एक बार फिर राहत भरा साबित होता है या नहीं।

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