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    राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान में 'मंत्रविज्ञान एवं यंत्र संरचना' पर राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

    1 hour ago

    जयपुर। राजस्थान मंत्र प्रतिष्ठान के तत्वावधान में आज दिनांक 01 जून, 2026 को 'मंत्रविज्ञान, ध्वनि तरंग विश्लेषण एवं यंत्र संरचना' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने की। इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजन सचिव व कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी उपस्थित रहे । कार्यक्रम का प्रारंभ प्रातः 10:00 बजे पारंपरिक वैदिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंत्र प्रतिष्ठान के निदेशक व कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुलदीप पालावत ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और विषय प्रवर्तन करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने कहा कि वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ही मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

    प्रथम तकनीकी सत्र: मंत्रविज्ञान व ध्वनि तरंग विश्लेषण सत्र को दो उप-विषयों में विभाजित किया गया , जिसका संचालन और विषय प्रवर्तन डॉ. राजधर मिश्र ने किया

    मंत्रों की विशिष्ट ध्वनियाँ इस विषय पर गहन विस्तृत चर्चा की गयी , जिसकी सत्राध्यक्षता बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. उपेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने की तथा प्रमुख परामर्शक के रूप में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. सुन्दरनारायण झा ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने बताया कि मंत्रों के सटीक उच्चारण से उत्पन्न ध्वनि तरंगें मस्तिष्क और वातावरण पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

    मंत्रोच्चार की आवृत्तियां: इस उप-सत्र की अध्यक्षता श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. रामराज उपाध्याय ने की तथा मुख्य परामर्शक के रूप में प्रो. रामानुज उपाध्याय उपस्थित रहे। सत्र में विभिन्न मंत्रों की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) और उनके वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित किया गया।

    द्वितीय तकनीकी सत्र: यन्त्र संरचना एवं ज्यामितीय ऊर्जा

    दोपहर 2:30 बजे से कार्यशाला के दूसरे सत्र की शुरुआत हुई, जिसका विषय प्रवर्तन व कुशल संचालन निदेशक शैक्षणिक परिसर डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने किया। इस सत्र को भी दो मुख्य भागों में बांटा गया यंत्रों का रेखीय विन्यास, बिन्दु व आकार का वैज्ञानिक आधार: उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में प्रमुख परामर्शक केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के डॉ. डी. दयानाथ ने रेखाओं और बिंदुओं से बनने वाली ज्यामितीय आकृतियों के पीछे छिपे विज्ञान को समझाया। यंत्रों द्वारा ऊर्जा का केन्द्रीकरण इस अंतिम विषय पर व्याकरण के पूर्व पीठाधीश प्रो. श्रीकृष्ण शर्मा ने सत्र की अध्यक्षता की और प्रमुख परामर्शक पं. सत्यनारायण शर्मा ने यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार यंत्र अपने विशिष्ट आकार के कारण ब्रह्मांडीय ऊर्जा को एक केंद्र पर स्थापित करने में सक्षम होते हैं।

    कार्यशाला के पहले दिन देश भर से आए शोधार्थियों, आचार्यों और विद्वानों ने सक्रिय सहभागिता की। आयोजन सचिव व कुलसचिव डॉ. गुंजन सोनी ने सभी आगंतुकों और विषय विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त किया इस अवसर पर प्रो मोहन लाल शर्मा डॉ. विनोद कुमार शर्मा, डॉ संदीप जोशी, डॉ स्नेहलता शर्मा,डॉ हेमन्त कृष्ण मिश्र सहित अनेक संस्कृत अनुरागी शिक्षक शोधार्थी उपस्थित थे।

     

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