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    बिना केप वाले असली सुपरहीरोज़: जेईसीआरसी के 'आशाएं' वॉरियर्स ने खून देकर बचाईं हज़ारों जान

    3 weeks ago

    -ब्लड डोनर्स बने 110 से अधिक शिक्षकों का किया सम्मान 

     

    -18 साल का सफर: 23 यूनिट से शुरू हुआ 'आशाएं' का कारवां आज हज़ारों परिवारों की उम्मीद 

     

    -असहाय के आंसू पोंछना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि- डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी 

     

    जयपुर, किसी भी प्रगतिशील समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहां की युवा पीढ़ी मानवीय संकटों के प्रति कितनी संवेदनशील है। इसी परिपक्व सोच और दूरगामी दृष्टि का परिचय देते हुए जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के 'अभ्युदया' इनिशिएटिव की स्टूडेंट-लेड ब्लड डोनेशन पहल 'आशायें -द लाइफ सेवियर्स' ने एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया।

     

    जिसका मक़सद उन 280 से ज़्यादा फ़र्स्ट टाइम फ़िमेल व मेल स्टूडेंट और फैकल्टी डोनर्स को शुक्रिया कहना था, जिन्होंने मेडिकल इमरजेंसी के वक़्त, रियल-टाइम बेसिस पर आगे आकर उन मरीज़ों की जान बचाई, जिन्हें ब्लड या सिंगल डोनर प्लेटलेट (एसडीपी) की तुरंत ज़रूरत थी।

     

    स्टूडेंट्स के इस निस्वार्थ आंदोलन की सराहना करते हुए, चीफ़ गेस्ट के रूप में उपस्थित जयपुर जिला कलेक्टर व मजिस्ट्रेट डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने यूथ को प्रेरित करते हुए स्पष्ट किया कि रक्त का निर्माण किसी कारखाने में असंभव है, इसलिए इस राष्ट्रीय आवश्यकता की पूर्ति केवल युवा शक्ति के महादान पर ही निर्भर है। सफलता के यथार्थ मायने समझाते हुए उन्होंने बताया कि ऊंचे ओहदों पर पहुंचकर भी अपनी करुणा और सहजता को जीवित रखना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से परे, किसी असहाय के आंसू पोंछकर उसे सुरक्षा का अहसास कराना तथा इंसानियत पर उसका भरोसा कायम रखना ही हमारे जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य होना चाहिए।

     

    इसी कड़ी में, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के वाईस चेयरपर्सन, अर्पित अग्रवाल ने आशाएं पहल के 18 वर्षों के सेवा और समर्पण के सफर को साझा करते हुए बताया कि दो छात्रों से शुरू हुआ यह कारवां आज रक्तदान में मिसाल बन चुका है। उन्होंने बताया कि पहले कैंप में एकत्रित की गई 23 यूनिट्स की तुलना में, इस बार 3132 यूनिट्स रक्त जुटाकर युवाओं ने एक ऐतिहासिक बढ़त दर्ज की और अपनी सफलता को प्रमाणित किया। एआई और तकनीक के दौर में भी मानवीय संवेदनाएं को सर्वोपरि बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी अनजान की जान बचाने के लिए तत्पर रहना ही सच्ची मानवता है। साथ ही, एसडीपी डोनेशन की महत्ता पर ज़ोर देते हुए युवाओं को निस्वार्थ भाव से इन जीवन रक्षक अभियानों का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया।

     

    वहीं, आशाएं के मेंटर प्रोफेसर जगदेव सिंह, व फ़ैकल्टी मेंबर्स- डॉ. शैव्य कुमार पाण्डेय और नेहा वर्मा ने युवाओं के डेडिकेशन की सराहना करते हुए बताया कि किताबी ज्ञान से परे समाज के प्रति यह संवेदनशीलता ही छात्रों के वास्तविक चरित्र का निर्माण करती है।

     

    समारोह में उन लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिन्हें संकट के समय 'आशाएं' के माध्यम से नवजीवन मिला; उन्होंने भावुक होते हुए जेईसीआरसी के ब्लड डोनर्स के प्रति आभार व्यक्त किया कि कैसे अनजान छात्रों की निस्वार्थ मदद ने उनके परिवार की खुशियाँ लौटाईं।

     

    साथ ही, भविष्य की दृष्टि साझा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि जेईसीआरसी का लक्ष्य ऐसे परिवेश का निर्माण करना है, जहाँ हर युवा अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी को समझते हुए इस जीवन रक्षक कारवां को और अधिक ऊर्जा के साथ निरंतर आगे बढ़ाता रहे।

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